Yug Purush

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8TH SEMESTER ! भाग-36 ( आकर्षण & प्रतिकर्षण )

"पोलीस...दरवाज़ा खोलो जल्दी"अपनी आवाज़ कड़क करते हुए मैने कहा"हॉस्टल  मे खून हुआ है और तू सो रहा है... खोल दरवाजा अभी डंडा डालता हूँ तेरे मे..... निकल बाहर"

इतना बोलकर मैं वहाँ से तुरंत अपने रूम की तरफ भागा और जब अंदर घुस गया तो मुझे उस रूम मे रहने वालो की आवाज़ सुनाई दी.......

"ये साले कुछ कुत्तो ने उपद्रव मचा रखा है कुछ दिनो से... ऐसी की तैसी कर दी है, जिंदगी की.... शिकायत करनी पड़ेगी इनकी.... कैमरा भी मरवाने के लिए लगवाया है कॉलेज वालों ने.. साला काम ही नही करता "
.............

हंसते हुए मैने BME की बुक पकड़ी और खुद को चारो तरफ से चादर मे लपेटकर बुक खोल कर बैठ गया....ले देकर कुछ तो पल्ले पड़ा और जैसे-जैसे मैं पढ़ते जाता इंटेरेस्ट खुद ब खुद बढ़ता जा रहा था, इस दौरान बीच बीच मे कभी ऐश का ख़याल आता तो कभी दीपिका मैम  का...  लेकिन उसी समय पता नही कैसी मनहूस घड़ी थी कि मुझे सिगरेट पीने की तलब हुई और मैं जब सिगरेट का बहुत ज़्यादा तलबदार हो गया तो सिगरेट की पैकेट उठाया...लेकिन वो पैकेट तो  बिल्कुल ,खाली था...

"ओये उठ..."अरुण को हिलाते हुए मैने कहा"उठ बे...."

"क्या है ...."जमहाई लेकर वो फिर सो गया...

"सिगरेट की पॅकेट कहाँ है..सिगरेट पीने का मन कर रहा ."

"मेरा पी ले..."

"तेरे उसमे मै माचिस मार दूँगा , नही तो जल्दी बता कहाँ है..."
और तब उसने अपने जेब से सिगरेट का डिब्बा निकालकर मुझे दिया, अरुण से सिगरेट लेकर मैं अपने बिस्तर पर आ धमका और सिगरेट पीते-पीते Isothermal Process के लिए वर्कडोन निकालने लगा....."

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साला कॉलेज मे टेस्ट भी इस लेवल की तैयारी के साथ लेटे थे, मानो वो टेस्ट ना हो बल्कि सेमेस्टर का एग्जाम हो... बाकायदा रोल नम्बर से सबको उनके alloted seat पर बिठाया जाता... जैसे एग्जाम मे होता है... मेरा और अरुण का रोल नंबर आगे -पीछे ही था... तो फिर क्लास भी सेम ही होना था... हम दोनों इस वक़्त जिस क्लास मे हमारा रोल नंबर था, उसके बाहर खड़े थे.

"फट  रही है यार...साला कुछ नही पढ़ा..."

"अब मैं क्या बोलू फट तो मेरी भी रही है,..."मैने जवाब दिया
"तू तो सुबह उठकर कुछ देख भी लिया है, मैं तो BME मे Virgin हूँ.."


इस वक़्त मैं और अरुण एग्जाम हॉल के सामने खड़े बतिया रहे थे, साइड मे बी एच यू  भी खड़ा था लेकिन वो हमसे बात ना करके अपनी कॉपी पकड़े हुए था, कहने को तो ये क्लास टेस्ट था लेकिन इस बार क्लास टेस्ट था.. साला किस एंगल से क्लास टेस्ट लग रहा है ये...😑

पेपर ईज़ी था, फिर भी थोड़ी बहुत मिस्टेक मुझसे  हर क्वेस्चन मे हुई, वैसे भी कुछ घंटो की पढ़ाई से ये होना तो लाजिमी था.... एग्जामिनेशन  हॉल से मैं बाहर निकला तो कॉरिडर मे दीपिका मैम  सामने से आती हुई दिखाई दी, हल्के पिंक कलर का सलवार - कमीज मे वो क़यामत ढा रही थी, ऊपर से उसी पिंक ड्रेस के कलर से मैच करता उनके होंठो का रंग... बाकी हॉट तो वो थी ही.... वो राइट साइड वाला लव थी मेरे लिए, इसलिए  उन्हे मेरी नज़र ने नीचे से देखना शुरू किया और उनके शरीर के हर एक अंग को नीचे से देखते हुए.. आँखों से ही उनके अंगों का सेवन करते हुए, फाइनली  मेरी आँखे.. उनकी आँखों से जा मिली.

"गुड मॉर्निंग मैम ..."जब वो पास आ गई तो हवसी मुस्कान लिए बोला

"मॉर्निंग...? अभी तो आफ्टरनून है..."

"सॉरी, वो टेस्ट का असर अभी तक है...गुड आफ्टरनून..मैम...."

"कैसा गया पेपर..."वो वही मेरे पास खड़ी हो गयी, उसने आज भी सॉलिड पर्फ्यूम मारा हुआ था जिससे मेरा तन और मन दोनो अंदर ही अंदर वाइब्रेशन कर रहे थे......

"ठीक गया...."एक लंबी साँस खींच कर मैने कहा और दीपिका मैम  के पर्फ्यूम की खुश्बू मेरे पूरे रोम-रोम मे समा गयी...मैं वहाँ खड़ा यही सोच रहा था कि वो  मुझे अभी, इस वक़्त  फिर से कहे कि चलो कंप्यूटर लैब  मे.. तो साला मजा ही आ जाये... इस बार मै नही बल्कि वो नर्वस रहेंगी... लेकिन उन्होने ऐसा कुछ भी नही कहा... वो बोली...

"अरमान, आइ हॅव टू गो...."

"किधर ,कंप्यूटर लैब  मे "मैने एक बार फिर उन्हें अपनी हवसी मुस्कान का दीदार करवाया

"Awwww..."

मैं उसकी इस अवववव पर एक स्माइल दी जिसे देखकर वो बोली"मुझे अभी काम है....बाय "

"कहाँ चल दी...कहाँ चल दी...प्यार की पुँगी बज़ा के..."दीपिका मैम  के जाने के बाद मैं खुद से बोला और उस रास्ते पर अपने कदम बढ़ा दिए जो कॉलेज से बाहर जाता था...

"न्यूज़ पेपर पढ़ के आता हूँ..."लाइब्ररी के सामने कॉलेज से बाहर जाते हुए मेरे  कदम रुके, मेरे कदम रुकने की एक वजह ये भी थी कि मैने ऐश को लाइब्ररी के अंदर घुसते हुए देख लिया था और वो बिल्कुल अकेली थी... मेरा मतलब.. नो गौतम... तो सोचा क्यूँ ना उसी से लड़कर थोड़ा मूड फ्रेश कर लिया जाए.....  वरना BME ने तो कल से दिमाग़ की तेरही करके ही रखी है

मैने लाइब्ररी के अंदर सहेज कर रक्खे हुए एक इंग्लिश न्यूज़ पेपर को उठाया और ठीक उसी जगह पर जाकर बैठा जहाँ ऐश बैठी हुई थी...उसके हाथ मे हिन्दी न्यूज़ पेपर था और वो न्यूज़ पेपर पढ़ने मे इतनी मगन थी कि उसने मुझे देखा तक नही.....अब मैं वहाँ आया तो ऐश से लड़ने के लिए था इसलिए किसी ना किसी टॉपिक पर बातचीत की शुरुआत तो करनी ही थी....


"पता नही लोग हिन्दी न्यूज़ पेपर क्यूँ पढ़ते है...मसालेदार न्यूज़ तो इंग्लिश  न्यूज़ पेपर मे ही रहती है..."न्यूज़ पेपर के पन्ने पलटते हुए मैं धीरे से बोला और तब मेरी आवाज़ सुनकर ऐश की नज़र मुझ पर पड़ी, उसने एक नज़र मुझे देखा और फिर न्यूज़ पेपर पढ़ने मे बिज़ी हो गयी.....


"इसने तो लड़ाई शुरू ही नही की ,कुछ और सोचना पड़ेगा..."

इंग्लिश न्यूज़ पेपर की पन्नो की आड़ मे मैने ऐश को देखा ,उसने पिंक कलर की स्कर्ट और जीन्स पहन रक्खी थी और तभी मेरे 1400 ग्राम के दिमाग़ मे उससे लड़ने का एक और आइडिया आया. मैं इस बार आवाज़ थोड़ी तेज़ करके बोला"आज कल लड़कियो को देखो, जीन्स पहन कर घूमती रहती है.. I hate that type of girls... Bloody Sanskarless People... ऐसी लड़किया यदि मेरे पास, मेरी ही टेबल पर सामने बैठ जाए तो गंगा जल से खुद को पवित्र करना पड़ेगा...."

और अबकी बार वो भड़की 😋,उसकी भूरी सी आँख मे ज़माने भर का गुस्सा उतर आया और वो मुझसे न्यूज़ पेपर छीन कर बोली..."तुम मुझे कह रहे हो ना...  राइट?"

"तुम भी यहाँ बैठी हो...? कमाल है मैने तो तुम्हे देखा नही..कही तुम मेरा पीछा तो नही कर रही.. देखो मै ऐसा -वैसा लड़का नही हूँ "इंग्लीश वर्ड पर ज़्यादा ज़ोर देते हुए मैने कहा "वो क्या है कि मैं English न्यूज़ पेपर पढ़ने मे इतना मगन था कि तुम्हे देखा नही और ये तो बिलकुल भी नही देखा की तुम हिंदी न्यूज़ पेपर पढ रही हो... Anyway, How are you....."

"फाइन..."वो चिल्ला उठी, गुस्सायी तो जरूर वो मुझपर.. पर मेरे how are यू का जवाब भी उसने दिया... पर गुस्से मे.. चीखकर... ये कित्ती अच्छी है यार... और तभी लाइब्ररी मे रहने वालो ने ऐश को चुप रहने का इशारा किया...

"इतना चिल्लाने की क्या ज़रूरत है ,गाँव से आई हो क्या "

"मुझे दोबारा मत दिखना वरना..."आवाज़ धीमी करके वो मुझसे बोली

"वरना..."न्यूज़ पेपर साइड करके आराम से वहाँ कुर्सी पर पसरते हुए   मैने कहा...

"वरना....वरना..."इधर उधर देखते हुए वो सोचने लगी कि वो मुझे क्या धमकी दे"वरना मैं तुम्हारा खून कर दूँगी..."

"ऊप्स ! वो तो पहले ही कर चुकी हो "

"अब जाओ यहाँ से..."मेरे इतना कहते ही वो  एक बार फिर चिल्लाई और लाइब्ररी इंचार्ज ने गुस्से मे अपना चश्मा सेट करते हुए  ऐश को तुरंत  वहाँ से बाहर जाने के लिए कहा...वो तुनक कर वहाँ से उठी और बाहर चली गयी.. अब जब ऐश ही वहा नही थी तो .मैं वहाँ बैठा-बैठा क्या करता... मैं भी उसी के पीछे चल पड़ा...

"अपनी गर्ल फ्रेंड को बोलो कि ये लाइब्ररी है यहाँ शांति से रहे..."जब मैं लाइब्ररी से निकल रहा था तो बुक इश्यू करने वाले ने मुझसे गुस्से मे  कहा जिसे सुनकर मैं खुश होता हुआ वहाँ से बाहर की ओर बढ़ा.....

"क्या सच मे तुम मेरा खून कर दोगी..."ऐश के पीछे - पीछे चलते हुए मैने पूछा

"हां, यदि दोबारा मुझे दिखे तो एक खंज़र सीने के आर-पार कर दूँगी...."

"चल बिल्ली , तेरे मे इतनी हिम्मत कहाँ..."

"क्याआआआआआ  कहा .......बिल्ली "वो गुस्से से भरी हुई तुरंत पीछे पलटी

"तो इसमे क्या बुरा कह दिया... तुम्हारी आँखे, बिल्ली की तरह भूरी है "हमारी लड़ाई अच्छी -ख़ासी चल पड़ी थी और आगे भी ऐसी ही चलती  कि तभी  अरुण, साला  अपना सड़ा सा मुँह  बनाकर पता नही कहा  से वहा  टपक पड़ा और बोला
"चल बे अरमान सिगरेट पीते है, मूड बहुत खराब है...."

"सिगरेट....? वो क्या होता है...? कोई नही कोल्ड ड्रिंक का नाम है क्या...?" ऐश के सामने अपना बचाव करते हुए और खुद को शरीफ दिखाने की कोशिश मे मैने कहा
"ऐश, कोल्ड ड्रिंक पियोगी मेरर साथ...?" मैने ऐश को प्रस्ताव दिया अपने साथ कैंटीन चलने का...

"भाड़ मे जाओ...."

"ओके.. जैसी तुम्हारी मर्जी..."

इसके  बाद मैं और अरुण वहाँ से निकल गये.... भाड़ मे जाने के लिए


                                                                                 By ~~~~

                  Yug Purush

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5 Comments

Kaushalya Rani

26-Nov-2021 06:35 PM

Very nice

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Yug Purush

02-Sep-2021 04:35 AM

Thanx friends

Reply

Aliya khan

01-Sep-2021 12:14 PM

Nice

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